श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए जुटी भक्तों की भारी भीड़, गोस्वामी महाराज ने कहा भगवान प्रेम भाव के भूखे होते हैं धन संपत्ति के नहीं,

श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए जुटी भक्तों की भारी भीड़,

श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए जुटी भक्तों की भारी भीड़, गोस्वामी महाराज ने कहा भगवान प्रेम भाव के भूखे होते हैं धन संपत्ति के नहीं,

नीमच श्री कृष्ण गोपी संवाद में कृष्ण द्वारा माखन चुराने का कार्य केवल उनके दूध को नहीं बल्कि गोपियों के प्रेम को स्वीकार करने का एक तरीका है। चोरी करना इस बात का प्रतीक है कि परमेश्वर औपचारिक भेंट स्वीकार करने के लिए प्रतीक्षा नहीं करते हैं वह प्रेम पूर्वक शुद्ध हृदय से उमड़ने वाली भक्ति को ही ग्रहण करते हैं।भगवान प्रेम भाव के भूखे होते हैं धन संपत्ति के नहीं,यह बात वृंदावन धाम मथुरा के  प्रख्यात श्रीमद् भागवत उपासक श्री जी बाबा महाराज के सुपुत्र बृज विभूषित श्रीमद् भागवत आचार्य संत श्री रमाकांत गोस्वामी ने कही। वे सिंहल परिवार द्वारा कमल अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत की ज्ञान गंगा में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि यदि हिंदू जाति भेद भुलाकर संगठित रहे तो राष्ट्र शक्तिशाली हो सकता है।भगवान कृष्ण पूरे ब्रह्मांड के अधिपति होने के बावजूद भी माता यशोदा से वही माता तू वात्सल्य प्रेम करते हैं जो एक संतान अपनी मां से करती है उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से संसार को यह संदेश दिया है की मां और संतान का प्रेम एक निस्वार्थ निश्चल प्रेम होता है। जो संसार में कहीं और नहीं मिलता है। मां का दूध पीने से बच्चे का  आत्म बल शक्तिशाली होता है। संसार की प्रत्येक माता अपने बच्चों से निस्वार्थ अत्यधिक प्रेम करती है। वृंदावन नाम भक्ति का आधार है कृष्ण ने भक्तों के निश्छल प्रेम के कारण ही जीवन पर्यंत वृंदावन नहीं छोड़ने का संकल्प लिया था।

श्री कृष्ण ने गायों को चराने का सेवा पुण्य कर्म किया था इसलिए हमें भी अपने बच्चों को पुत्र है तो व्यापार में और बेटी है तो गृह कार्य सीखाना चाहिए। जापान और इजराइल में 14 साल का बालक सभी तरह की वोटर गाड़ी ड्राइविंग कर देता है स्वयं कर लेता करने का अभ्यास करता है तो भारत के बच्चों को भी अभ्यास कर जीवन में आने वाले ड्राइविंग जैसे हर कार्य को सिखना चाहिए। हमारे बच्चे भी भगवान कृष्ण से प्रेरणा लेकर हर क्षेत्र में प्रतिभा वान बनना चाहिए। तभी भारत राष्ट्रीय विश्व गुरु के शिखर पर पहुंचेगा। परिवार में एकता के लिए सजग रहना चाहिए। कृष्ण द्वारा माखन लीला में जो हास्य के अनुभव बताए गए हैं,

और जीवन को हंसते हुए आगे बढ़ना चाहिए तो हमें हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। श्री कृष्ण गा चलाते थे तब ब्रह्मा जी ने एक बार उनकी परीक्षा लेने के लिए अरे गायों को पैसे की वैसी सारी गए बना दी और ब्रह्मा जी को आश्चर्य में डाल दिया था।वृंदावन की रज कमल मस्तक पर लगाने योग्य होती है क्योंकि वहां श्री कृष्ण पैदल विहार करते हैं। श्री कृष्ण के भक्त गोपिया सभी वर्ग की होने से समाज में एकता का संचार होता था।श्रीमद् भागवत कथा आरती में वैश्य सम्मेलन समाज इकाई के संभागीय अध्यक्ष संतोष चोपड़ा, समाजसेवी युवा हृदय सम्राट मनोहर सिंह लोढ़ा, दिगंबर जैन समाज के पूर्व अध्यक्ष जम्मू कुमार जैन,गोविंद पोरवाल,हरि बल्लभ मुछाल, तुषार लालका,

वस्त्र व्यवसाय संघ के अध्यक्ष दिलीप मोगरा, सचिव दीपक शर्मा शुभ प्रभात योग मित्र मंडल के शिव माहेश्वरी, दिलीप चौधरी, भरत जाजू, भारत विकास परिषद के रवि पोरवाल, सुशील गट्टानी बनवारी लाल अग्रवाल, राजू अग्रवाल,गोपाल सिंहल, सुनील सिंहल, अग्रवाल विकास समिति के अध्यक्ष गोपाल गर्ग ,सचिव सुनील सिंहल,विनोद गर्ग, जितेंद्र गर्ग,अग्रसेन पुष्पांजलि मासिक पत्रिका इंदौर के वरिष्ठ संपादक नरेंद्र अग्रवाल इंदौर ,सहित बड़ी संख्या में समाज जन उपस्थित थे। कथा में सभी महिलाएं पुरुष‌ गुलाबी परिधानों में सहभागी बनें, इस अवसर पर सनातन धर्म पर आधारित विभिन्न प्रश्नों की जिज्ञासा के उत्तर भी महाराज श्री ने दिए इस अवसर पर श्री कृष्ण बलराम, नंदबाबा,पुतना राक्षसी,राधा,

गुरु गर्गाचार्य, गोपिया माखन लीला, यशोदा मैया बालकृष्ण संवाद,भगवान शंकर मोहिनी रुप,इंद्र देवता ,विष्णु, राक्षस वर्ग,सनातन धर्म, सत्य , शेषनाग, कालिया देह, धेनुकासुर वध ,यमुना नदी ,कंस ,ब्रह्मा, ब्रजभाषा , तक्षक नाग, श्री कृष्णा,राजा परीक्षित ,नारद मुनि इंद्रदेव सहित श्रीमद् भागवत के विभिन्न धार्मिक विषयों का वर्तमान परिपेक्ष में महत्व प्रतिपादित किया गया श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा प्रतिदिन 22 से 28 दिसंबर तक दोपहर 2 से 6 बजे तक श्री मद्भागवत ज्ञान में आयोजित की जा रही है। माखनलीला उत्सव मनाया,श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा के बीच जब आचार्य श्री ने श्री कृष्ण माखन लीला एवं  श्री कृष्ण का प्रसंग बताया तो भक्ति पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों द्वारा से बालकृष्ण का पुष्प वर्षा से स्वागत किया।