NEWS: दुबई के वर्ल्ड एजुकेशन समिट 2026 में नीमच का परचम,क्रिएटिव माइंड्स ग्लोबल स्कूल डायरेक्टर विकास मदनानी बने इंटरनेशनल स्पीकर,पढ़े खबर
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय शिक्षा का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्र के एकमात्र शिक्षाविद
नीमच। शहर के प्रतिष्ठित सीबीएसई स्कूल क्रिएटिव माइंड्स ग्लोबल स्कूल के डायरेक्टर विकास मदनानी ने एक बार फिर नीमच और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस बार यह उपलब्धि राष्ट्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गत सप्ताह दुबई में आयोजित वर्ल्ड एजुकेशन समिट–2026 में श्री मदनानी को आयोजकों द्वारा बतौर स्पीकर आमंत्रित किया गया। उन्होंने “Education Leadership in the Age of Disruption: Cultivating Future Ready Schools” विषय पर अपने विचार साझा किए, जिसमें भविष्य के स्कूलों के निर्माण में स्कूल लीडरशिप की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस अंतरराष्ट्रीय पैनल डिस्कशन में विकास मदनानी एकमात्र भारतीय शिक्षाविद थे। उनके साथ यूएई से जेम्स एजुकेशन की एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट नरगिस खमबत्ता, इटली से जूनियर अचीवमेंट इटालिया की सीईओ मरियम क्रेस्टा तथा रोम से सेंट जॉर्ज ब्रिटिश इंटरनेशनल स्कूल के असिस्टेंट हेड एंड्रयू लिनि शामिल रहे। गौरतलब है कि वर्ल्ड एजुकेशन समिट–2026 का आयोजन दुबई डाउनटाउन स्थित फाइव स्टार होटल शांगरी-ला में बुधवार और गुरुवार को किया गया, जिसमें दुनिया के 25 देशों से करीब 400 शिक्षाविदों ने भाग लिया। इस वैश्विक मंच पर नीमच के एक शिक्षाविद को बतौर स्पीकर आमंत्रित किया जाना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

कॉन्फ्रेंस के बाद अगले दिन विकास मदनानी को दुनिया के चुनिंदा स्कूल लीडर्स के साथ दुबई के नंबर-1 इंटरनेशनल स्कूल ‘जेम्स मॉडर्न एकेडमी’ के शैक्षणिक भ्रमण के लिए भी आमंत्रित किया गया। यहां उन्होंने विभिन्न देशों के विद्यार्थियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों से संवाद कर ग्लोबल एजुकेशन सिस्टम को नजदीक से समझा। विकास मदनानी ने बताया कि क्रिएटिव माइंड्स ग्लोबल स्कूल को विकसित करने की यात्रा और स्कूल में किए जा रहे नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा करना उनके लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा।

उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में स्कूली शिक्षा की भूमिका पर रखे गए उनके विचारों को दुनिया के शीर्ष शिक्षाविदों ने सराहा।
उन्होंने विश्वास जताया कि इस अंतरराष्ट्रीय अनुभव से प्राप्त सीख को स्कूल में जमीनी स्तर पर लागू कर शिक्षा के स्तर को वैश्विक मानकों तक पहुंचाया जाएगा।
