BIG NEWS : जीरन कॉलेज में सियासत की जंग चरम पर, मनमानी नियुक्ति से लेकर बर्खास्तगी तक छिड़ी अंदरूनी लड़ाई,कोर्ट के फैसले के बाद बदला सत्ता समीकरण,पार्षदों का विधायक दिलीपसिंह परिहार को पत्र—दो शिक्षकों के तबादले की जोरदार मांग से मचा राजनीतिक भूचाल,पढ़े पूरी खबर
जीरन। शासकीय महाविद्यालय जीरन में चल रहे विवाद ने अब खुलकर राजनीतिक रंग ले लिया है। कॉलेज में मचे बवाल के बीच रोज नई जानकारियां सामने आ रही हैं। अब तक प्रभारी प्राचार्य दीपा कुमावत के खिलाफ उठ रहे आक्रोश पर भाजपा नेताओं की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे थे, लेकिन अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आधिकारिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।

मंगलवार को जीरन नगर परिषद के भाजपा पार्षदों ने क्षेत्रीय विधायक दिलीपसिंह परिहार तथा भाजपा दक्षिण मंडल अध्यक्ष मदन गुर्जर के नाम एक पत्र सौंपा। पत्र में आरोप लगाया गया है कि जीरन कॉलेज को शिक्षा का मंदिर बनाने के बजाय राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है।दो प्राध्यापकों की आपसी खींचतान और टकराव से न केवल शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हुई है,बल्कि कॉलेज की छवि भी धूमिल हुई है। पत्र में प्रभारी प्राचार्य दीपा कुमावत और प्राध्यापक दिव्या खरारे दोनों को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित कर नई व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।

पुराने विवाद की परतें आईं सामने
भाजपा पार्षदों के इस पत्र से विवाद में “तीसरे नाम” की एंट्री ने सभी को चौंका दिया है। जब मामले की पड़ताल की गई तो सामने आया कि कॉलेज का यह द्वंद नया नहीं, बल्कि पुराना है। भाजपा नेताओं के अनुसार दीपा कुमावत का व्यवहार भले ही कठोर माना जाता रहा हो, लेकिन उनके हटाए जाने के पीछे की कहानी अलग बताई जा रही है। कुछ वर्ष पूर्व प्राध्यापक दिव्या खरारे के साथ विवाद के बाद दीपा कुमावत पर प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसके पश्चात कॉलेज का प्रभार दिव्या खरारे को सौंप दिया गया था।बताया जाता है कि प्रभार संभालने के बाद दिव्या खरारे द्वारा नियम विरुद्ध आउटसोर्स भर्ती, रिश्तेदार को नौकरी देने और एक विशेष परिवार को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप लगे। हालांकि जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी थी, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कोर्ट के आदेश के बाद बदली स्थिति बाद में न्यायालय के निर्णय के पश्चात शासन ने पुनः दीपा कुमावत को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। पद संभालते ही उन्होंने नियम विरुद्ध की गई आउटसोर्स नियुक्तियों को निरस्त कर संबंधित कर्मचारियों को हटा दिया। इससे कई हित प्रभावित हुए और यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया। अब आरोप है कि निकाले गए कर्मचारियों और विरोधी पक्ष द्वारा दीपा कुमावत के कठोर व्यवहार को मुद्दा बनाकर विवाद को हवा दी जा रही है।

समाधान की मांग
भाजपा पार्षदों का मानना है कि कॉलेज की मूल समस्या व्यक्तिगत टकराव और राजनीतिक हस्तक्षेप है। इसलिए दोनों शिक्षकों का स्थानांतरण ही फिलहाल एकमात्र समाधान है, ताकि छात्र-छात्राएं शांतिपूर्ण वातावरण में पढ़ाई कर सकें और कॉलेज की शैक्षणिक गरिमा बहाल हो सके।

जीरन कॉलेज का यह विवाद अब प्रशासन और राजनीतिक नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।