BIG NEWS:KBC में नागदा को ‘छोटा गांव’ बताना पड़ा भारी, अमिताभ बच्चन पर अदालत का शिकंजा,अगली सुनवाई 12 फरवरी को, क्या है पूरा मामला पढ़े ये खबर

BIG NEWS:KBC में नागदा को ‘छोटा गांव’ बताना पड़ा भारी, अमिताभ बच्चन पर अदालत का शिकंजा,अगली सुनवाई 12 फरवरी को, क्या है पूरा मामला पढ़े ये खबर

नागदा। देश के सबसे लोकप्रिय टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में तथ्यों से खिलवाड़ अब कानूनी पचड़े में बदल गया है। केबीसी में मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर नागदा को “छोटा सा गांव” बताए जाने के मामले में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के खिलाफ नागदा न्यायालय में परिवाद दर्ज किया गया है। न्यायालय द्वारा अमिताभ बच्चन के नाम जारी नोटिस मुंबई स्थित उनके आवास ‘जलसा’ भेजा गया, जो बैरंग लौट आया। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को तय की गई है।

राष्ट्रीय मंच से फैलाई गई भ्रामक जानकारी!

यह परिवाद वरिष्ठ अभिभाषक एल.एन. लोहरवाड एवं नोटरी आर.के. ठाकुर द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जबकि प्रकरण की पैरवी वरिष्ठ अभिभाषक एस.के. साहू कर रहे हैं। न्यायालय सूत्रों के अनुसार मामला फिलहाल यूएनसीआर के रूप में दर्ज है। परिवाद के मुताबिक 23 दिसंबर 2025 को सोनी लिव पर प्रसारित कौन बनेगा करोड़पति सीजन-17 के एपिसोड क्रमांक 97 में ‘रोचक जानकारी’ के नाम पर नागदा की वास्तविक पहचान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।

गांव नहीं, औद्योगिक शहर है नागदा

परिवादकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि नागदा कोई गांव नहीं, बल्कि डेढ़ लाख से अधिक आबादी वाला औद्योगिक शहर,मुंबई-दिल्ली मुख्य रेलमार्ग का प्रमुख जंक्शन,और चंबल नदी के तट पर बसा नगर है,जहां वर्षों से नियमित पेयजल आपूर्ति होती रही है। यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश शासन नागदा को जिला बनाने की घोषणा कर चुका है, ऐसे में इसे “छोटा गांव” कहना न केवल तथ्यात्मक भूल बल्कि क्षेत्र की छवि पर सीधा प्रहार है।

ग्रेसिम को लेकर भी सवाल

कार्यक्रम में ग्रेसिम इकाई द्वारा जल संकट समाधान के जो दावे दिखाए गए, उन पर भी परिवादकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ग्रेसिम द्वारा बनाए गए बांध जनसामान्य के लिए नहीं, बल्कि औद्योगिक संचालन के लिए हैं, फिर भी उन्हें जनहित के रूप में प्रस्तुत किया गया।

अधिवक्ता का तीखा बयान

मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अभिभाषक एस.के. साहू ने कहा—“राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में तथ्यों के विपरीत जानकारी देकर नागदा शहर की पहचान को नुकसान पहुंचाया गया है। यह गंभीर मामला है।” उन्होंने बताया कि प्रकरण केबल टेलीविजन नेटवर्क अधिनियम एवं आईपीसी की धारा 420 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 318) के अंतर्गत विचारणीय है। नोटिस की तामील नहीं होने के चलते आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी।