NEWS: इनकी गरिमामयी उपस्थिति मे,जन्मदिन को मनाया सेवा पर्व,मिला प्रशासनिक सहयोग,हुआ वनांचल क्षेत्र मे रक्तदान शिविर का आयोजन,दिया विश्व शांति का अनोखा संदेश,पढ़े खबर
नीमच। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध और तनाव के दौर में वनांचल की धरती से विश्व शांति का अनोखा संदेश सामने आया। जीरन तहसील के दूरस्थ ग्राम चैनपुरा डैम में भाजपा नेता मनोहर रावत के नेतृत्व में आयोजित रक्तदान शिविर ने मानवता, सेवा और देशभक्ति की मिसाल पेश की। शिविर में 56 युवाओं ने रक्तदान कर जरूरतमंदों की मदद का संकल्प लिया, वहीं मनोहर रावत ने अपने रक्त से “भारत – विश्व शांति का प्रतीक” लिखकर शांति और सद्भाव का संदेश दिया।

जन्मदिन को बनाया सेवा का पर्व
जहां अक्सर जन्मदिन समारोह में फिजूलखर्ची देखने को मिलती है, वहीं भाजपा नेता मनोहर रावत ने अपने जन्मदिन को समाज सेवा से जोड़ते हुए रक्तदान शिविर का आयोजन किया। उनके एक आह्वान पर वनांचल क्षेत्र के युवाओं में उत्साह उमड़ पड़ा और बड़ी संख्या में युवाओं ने रक्तदान कर मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

पहली बार रक्तदान कर युवाओं ने तोड़ा डर
वनवासी बहुल और सीमित संसाधनों वाले इस क्षेत्र में रक्तदान को लेकर विशेष जागरूकता देखने को मिली। शिविर में 56 युवाओं ने रक्तदान किया, जिनमें से 45 युवाओं ने पहली बार रक्तदान कर अपने डर को पीछे छोड़ते हुए सेवा का संदेश दिया। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र के युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंदों के लिए रक्त उपलब्ध कराना रहा।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस पुनीत आयोजन में पूर्व मंडल अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह भाटी, दक्षिण मंडल अध्यक्ष मदन गुर्जर और महामंत्री दिलीप सिंह चौहान सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उपस्थित रहकर युवाओं का उत्साहवर्धन किया।
प्रशासनिक टीम का मिला सहयोग
दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चले इस शिविर को सफल बनाने में सीएचसी जीरन के बीएमओ डॉ. विजय भारती, रेडक्रॉस ब्लड बैंक प्रभारी सत्येंद्र सिंह पतलासी तथा उप-स्वास्थ्य केंद्र चैनपुरा डैम के स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेवा ही सच्चा जन्मदिन – मनोहर रावत
इस अवसर पर भाजपा नेता मनोहर रावत ने कहा कि “वनांचल के युवाओं को जागरूक करना ही मेरा लक्ष्य है। फिजूलखर्ची के बजाय समाज के काम आना ही सच्चे अर्थों में जन्मदिन मनाना है।”
इस आयोजन ने साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व सकारात्मक सोच के साथ आगे आए तो दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में भी जागरूकता और सेवा की नई मिसाल कायम की जा सकती है, और रक्त की एक-एक बूंद से विश्व शांति का संदेश दिया जा सकता है।
