BREAKING NEWS: स्वरोजगार योजना में लोन वितरण पर बड़ा सवाल! पात्र हितग्राही बैंक के चक्कर काटने को मजबूर, भाजपा नेता ने उठाई आवाज, पढ़े खबर

सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी, एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

BREAKING NEWS: स्वरोजगार योजना में लोन वितरण पर बड़ा सवाल! पात्र हितग्राही बैंक के चक्कर काटने को मजबूर, भाजपा नेता ने उठाई आवाज, पढ़े खबर

रिपोर्ट : बबलू यादव 

नागदा। सरकार युवाओं और जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार योजनाओं के जरिए ऋण उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन नागदा में योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पात्रता पूरी करने के बावजूद कई हितग्राही लोन स्वीकृति के लिए बैंकों और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

मामले को लेकर भाजपा नेता एवं सांसद प्रतिनिधि प्रकाश जैन ने मोर्चा संभालते हुए अनुभागीय अधिकारी (राजस्व) नागदा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को ऋण नहीं मिलने के मामले में बैंकों की कार्यप्रणाली की जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

पात्र हैं तो फिर लोन में अड़चन क्यों?

ज्ञापन में कहा गया कि स्वरोजगार योजना का उद्देश्य युवाओं और जरूरतमंद लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद यदि पात्र आवेदकों के आवेदन लंबित रहते हैं या उन्हें बिना उचित कारण ऋण का लाभ नहीं मिल पाता, तो योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े होते हैं।

प्रकाश जैन ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि पात्र हितग्राहियों के आवेदनों में देरी या अस्वीकृति का वास्तविक कारण क्या है।

कागजों में योजना, जमीन पर हितग्राही परेशान!

भाजपा नेता ने कहा कि यदि जांच में बैंक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही, अनावश्यक देरी या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द योजना का लाभ दिलाने की मांग भी की गई है, ताकि वे अपने रोजगार और व्यवसाय की शुरुआत कर आत्मनिर्भर बन सकें।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हितग्राही पात्र हैं तो उन्हें ऋण का लाभ मिलने में आखिर अड़चन कहां आ रही है?

यदि प्रशासन मामले की गंभीरता से जांच करता है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है और यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि पात्र आवेदनों में देरी या परेशानी के पीछे बैंकिंग प्रक्रिया, दस्तावेजी कमी या किसी स्तर की लापरवाही जिम्मेदार है।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और पात्र हितग्राहियों को उनका हक कब तक मिलता है।