BIG NEWS: चीताखेड़ा में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल! खरीदी हुई कृषि भूमि पर कब्जे का आरोप, धमकियों और कथित झूठी शिकायतों से परेशान बैरागी पहुंचा एसपी के दरबार, पढ़े खबर
खेत पर कृषि कार्य करने पहुंचा तो विवाद और मारपीट की धमकी का आरोप, एससी/एसटी एक्ट के कथित दुरुपयोग व एकतरफा पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
नीमच। ग्राम चीताखेड़ा में कृषि भूमि को लेकर चल रहा विवाद अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। कनावटी निवासी राजेश बैरागी ने पुलिस अधीक्षक नीमच को ज्ञापन सौंपकर कुछ लोगों पर जमीन को लेकर लगातार विवाद करने, पैसों की मांग करने, धमकाने और एससी/एसटी एक्ट के नाम पर कथित रूप से झूठी शिकायतें करने के आरोप लगाए हैं। बैरागी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन के अनुसार राजेश बैरागी ने ग्राम चीताखेड़ा में सर्वे नंबर 1503 की करीब 10 बीघा कृषि भूमि वर्ष 2023 में चौंदमल पिता नंदराम के हिस्से से खरीदी थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन खरीदने के बाद चौंदमल के भाई चतुर्भुज एवं उनके परिवार के लोगों ने विवाद शुरू कर दिया और उसे कथित रूप से हरिजन एक्ट में फंसाने की धमकी दी जाने लगी।

गांव में समझौता, फिर भी बढ़ती गई कथित पैसों की मांग
राजेश बैरागी के मुताबिक विवाद के बाद गांव के लोगों की मौजूदगी में समझौता कराया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि समझौते के दौरान भी जमीन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ और बाद में 10 लाख रुपए की मांग की गई। बैरागी का कहना है कि उसने 5 लाख रुपए का भुगतान भी किया तथा समझौते के तहत लगभग 15 लाख रुपए के मूल्य का बाड़ा बनाकर देने और 5 लाख रुपए चतुर्भुज सालवी को देने की बात हुई। इस संबंध में राजीनामा किए जाने का भी उल्लेख ज्ञापन में है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद बाद में फिर से पैसों की मांग शुरू हो गई और गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर उसे परेशान किया जाने लगा। बैरागी ने दावा किया कि उसके द्वारा खरीदी गई भूमि पर कृषि कार्य करने से भी रोका गया।
खेत पर पहुंचने पर कथित मारपीट की धमकी
ज्ञापन में 7 अगस्त 2026 की घटना का भी उल्लेख किया गया है। राजेश बैरागी के अनुसार वह अपनी बोई हुई फसल पर खाई तथा अन्य कृषि कार्य करने के लिए जेसीबी लेकर पहुंचा था। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने कथित रूप से एकजुट होकर उसके और उसके मजदूर हेमंत विश्वकर्मा के साथ विवाद किया तथा पत्थर और लाठी-डंडे फेंकने की धमकी दी। शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना का वीडियो उसके पास उपलब्ध है तथा आसपास के लोगों द्वारा बीच-बचाव किया गया। बैरागी के अनुसार घटना में उसके मजदूर को चोट आई, जिसके बाद उसे जीरन थाना पुलिस द्वारा सरकारी अस्पताल ले जाकर मेडिकल कराया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि चोट और अत्यधिक दर्द के कारण वह तत्काल अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा सका।

एकतरफा कार्रवाई का आरोप, एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में राजेश बैरागी ने आरोप लगाया कि उसने पूर्व में जीरन थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी शिकायतें दी थीं, लेकिन उसके अनुसार अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में उसके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लगा दी गईं। राजेश बैरागी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उसके पास उपलब्ध वीडियो साक्ष्य और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उसने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई की भी समीक्षा करने तथा यदि दूसरे पक्ष द्वारा झूठी शिकायत की गई है तो जांच के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय की शरण लेने के लिए मजबूर होगा।