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जीरन। अल्पवर्षा के चलते आगामी गर्मी में पेयजल संकट की आशंका के बीच जीरन तालाब के पानी को सिंचाई के लिए उपयोग करने का मामला गरमा गया है। नगर की प्यास बुझाने के लिए महत्वपूर्ण तालाब के पानी को लेकर अब नगर परिषद ने भी मोर्चा खोल दिया है। नगर परिषद का कहना है कि तालाब में उपलब्ध जल को पेयजल व्यवस्था के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए, क्योंकि पानी की कमी के चलते दिसंबर 2026 तक ही पेयजल संकट गहराने की आशंका है। इसके बावजूद तालाब के पानी को लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई में उपयोग करने की योजना सामने आने से विवाद की स्थिति बन गई है।

नगर परिषद जीरन ने 29 अक्टूबर 2026 को जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री, नीमच को आधिकारिक पत्र जारी कर तालाब के पानी को पेयजल के लिए आरक्षित रखने और सिंचाई में उपयोग नहीं करने का अनुरोध किया है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर आयोजित बैठक में किसानों की कम उपस्थिति के बावजूद नहर खोलने का प्रस्ताव पारित किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। नगरवासियों का कहना है कि जब नगर की पेयजल जरूरतों पर संकट मंडराने की आशंका है, तब तालाब के पानी के इस्तेमाल को लेकर निर्णय लेते समय नागरिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

 350 पंजीकृत किसानों में से 8-10 की मौजूदगी, फिर भी प्रस्ताव पारित होने का दावा

जीरन तालाब से सिंचाई के लिए नहर खोलने को लेकर गणपति मंदिर परिसर में जल संसाधन विभाग की बैठक आयोजित किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर किए गए दावे के अनुसार, तालाब से सिंचाई का लाभ लेने वाले करीब 350 पंजीकृत किसानों में से बैठक में केवल 8 से 10 किसान ही पहुंचे थे। इतनी कम उपस्थिति के बावजूद नहर खोलने का प्रस्ताव पारित होने की बात कही जा रही है।

इस घटनाक्रम को लेकर नगर के नागरिकों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि तालाब के पानी का उपयोग केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर की पेयजल व्यवस्था भी इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में पानी के उपयोग को लेकर कोई भी निर्णय लेते समय उपलब्ध जल की स्थिति, आगामी गर्मी की जरूरत और नगर की आबादी की पेयजल आवश्यकताओं का आकलन किया जाना चाहिए।

हालांकि, बैठक में उपस्थिति, प्रस्ताव पारित होने की प्रक्रिया और नहर खोलने के निर्णय की आधिकारिक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से होना बाकी है।

 नगर परिषद के पत्र में दिसंबर तक पेयजल संकट की आशंका

नगर परिषद द्वारा जारी पत्र क्रमांक 2095/पेयजल/2026 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस वर्ष अल्पवर्षा होने के कारण निकाय क्षेत्र के पेयजल स्रोतों में पानी की उपलब्धता काफी कम होने की आशंका है। पत्र में दिसंबर 2026 तक पेयजल संकट उत्पन्न होने की प्रबल संभावना भी जताई गई है।

नगर परिषद ने जल संसाधन विभाग को बताया है कि जीरन तालाब का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में तालाब के पानी का उपयोग सावधानी से किया जाना जरूरी है। नगर परिषद के अनुसार, निकाय क्षेत्र के समस्त पेयजल स्रोत तालाब के किनारे स्थित हैं और तालाब का पानी इन स्रोतों को रिचार्ज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी वजह से तालाब में उपलब्ध पानी को बचाकर रखना नगर की भविष्य की पेयजल व्यवस्था के लिए आवश्यक बताया गया है।

लिफ्ट इरिगेशन योजना पर उठे सवाल, पानी बचाने की मांग

नगर परिषद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि उसके संज्ञान में आया है कि जल संसाधन विभाग द्वारा तालाब के पानी को लिफ्ट इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई के लिए उपयोग करने की योजना प्रस्तावित है। इस पर चिंता जताते हुए परिषद ने कहा है कि वर्तमान में तालाब में उपलब्ध जल को पेयजल के लिए आरक्षित रखा जाए और उसे सिंचाई के उपयोग में नहीं लिया जाए।

नगर परिषद की मांग है कि जीरन की पेयजल व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तालाब के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए करने से बचा जाए। परिषद ने अपने पत्र के माध्यम से जल संसाधन विभाग से इस मामले में आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

रसूखदार किसानों को फायदा पहुंचाने के आरोप, प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले को लेकर कुछ प्रभावशाली किसानों को लाभ पहुंचाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। नगरवासियों का आरोप है कि यदि तालाब के पानी को सिंचाई के लिए छोड़ दिया गया तो इसका खामियाजा आने वाले समय में पूरे नगर को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि, किसी अधिकारी या किसान की मिलीभगत की पुष्टि करने वाले स्वतंत्र तथ्य सामने नहीं आए हैं।

नागरिकों की मांग है कि प्रशासन मामले की निष्पक्ष जांच कराए और तालाब के पानी के उपयोग को लेकर स्पष्ट निर्णय ले। उनका कहना है कि नगर की पेयजल जरूरतों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। यदि पानी की उपलब्धता कम है तो पहले नगरवासियों के लिए पेयजल सुरक्षित रखने की व्यवस्था की जाए।

कलेक्टर, एसडीएम और शहरी विकास विभाग को भी भेजा पत्र

नगर परिषद ने अपने पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर नीमच, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नीमच तथा परियोजना अधिकारी, जिला शहरी विकास अभिकरण नीमच को भी सूचनार्थ भेजी है। इससे स्पष्ट है कि नगर परिषद इस मामले को प्रशासन के संज्ञान में लाना चाहती है, ताकि जीरन की पेयजल व्यवस्था को ध्यान में रखकर आवश्यक निर्णय लिया जा सके।

अब इस मामले में जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है, तो दूसरी तरफ अल्पवर्षा के बीच नगर की पेयजल व्यवस्था सुरक्षित रखने की चुनौती है। ऐसे में जीरन तालाब के पानी का उपयोग किस तरह किया जाएगा, इस पर होने वाला निर्णय आने वाले महीनों में नगर की जल व्यवस्था के लिहाज से अहम रहेगा।

नगर परिषद की मांग स्पष्ट है—जीरन तालाब में उपलब्ध पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखा जाए और सिंचाई के लिए उसका उपयोग नहीं किया जाए, ताकि आने वाले गर्मी के मौसम में नगरवासियों को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े।