BIG NEWS: 24 साल देश की सरहदों पर डटे रहे वीर, अब गांव में बना जश्न, कदम-कदम पर फूल बरसे, 9 बार साफा बांधकर हुआ ऐसा सम्मान कि हर आंख हुई नम, पढ़े खबर

BIG NEWS: 24 साल देश की सरहदों पर डटे रहे वीर, अब गांव में बना जश्न, कदम-कदम पर फूल बरसे, 9 बार साफा बांधकर हुआ ऐसा सम्मान कि हर आंख हुई नम, पढ़े खबर

नीमच। जिले की मनासा तहसील के ग्राम कुंडला में शुक्रवार का दिन इतिहास बन गया, जब भारतीय सेना में 24 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले वीर जवान मुकेश राठौर का गांव लौटने पर ऐसा स्वागत हुआ, जिसे देखने वाले हर व्यक्ति की आंखों में गर्व और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

3 अप्रैल की सुबह जैसे ही मुकेश राठौर ने अपने गांव की सरहद पर कदम रखा, पूरा कुंडला मानो उत्सव में बदल गया। ढोल-नगाड़ों, देशभक्ति गीतों और जयकारों के बीच ग्रामीणों ने अपने लाल का स्वागत किया। हर चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।

 मंदिर में हवन से हुई शुरुआत, गांव बना आस्था का केंद्र

इस ऐतिहासिक दिन की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान से हुई। गांव के तालाब किनारे स्थित प्रसिद्ध कालेश्वर मंदिर में विशेष हवन का आयोजन किया गया, जिसमें परिवारजनों और ग्रामीणों ने मिलकर आहुतियां दीं। वातावरण पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो गया। हवन के बाद सुबह 11 बजे भव्य पैदल रैली की शुरुआत हुई।

6 किलोमीटर पैदल चलकर लिया हर गली का आशीर्वाद

करीब 3500 की आबादी वाले कुंडला गांव में यह आयोजन अभूतपूर्व रहा। मुकेश राठौर ने पूरे गांव में लगभग 6 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की। वे हर गली, हर मोहल्ले और नई बस्तियों तक पहुंचे। सैन्य वर्दी में सजे इस वीर को देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। डीजे पर बजते देशभक्ति गीतों ने माहौल को और भी जोश से भर दिया।

 हर कदम पर पुष्प वर्षा, 9 जगह साफा बांधकर किया गया भव्य सम्मान

गांववासियों ने अपने वीर का स्वागत किसी त्योहार से कम नहीं किया। जैसे-जैसे रैली आगे बढ़ी, घरों की छतों और रास्तों से सैकड़ों बार पुष्प वर्षा की गई। खास बात यह रही कि गांव के 9 प्रमुख स्थानों पर रुककर मुकेश राठौर का साफा बांधकर विशेष सम्मान किया गया। यह सम्मान गांव के गर्व और प्रेम का प्रतीक बन गया।

बुजुर्गों के चरणों में झुका वीर, लिया आशीर्वाद

इस पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब मुकेश राठौर हर गली में खड़े बुजुर्गों के पास पहुंचे और उनके चरण स्पर्श किए। बुजुर्गों ने भी अपने आशीर्वाद से उन्हें नवाजा। यह दृश्य हर किसी के दिल को छू गया।

एकता और सम्मान की मिसाल बना कुंडला गांव

सुबह 11 बजे कालेश्वर मंदिर से शुरू हुई यह पदयात्रा दोपहर में वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे आयोजन में अनुशासन, सम्मान और गांव की एकजुटता साफ नजर आई। परिजनों के अनुसार, 24 वर्षों तक देश की सीमाओं पर सेवा देने के बाद अब मुकेश राठौर अपने परिवार और गांव के बीच समय बिताएंगे।