BIG NEWS : विक्रम सीमेंट प्लांट में लापरवाही पड़ी भारी, दो कर्मचारियों को 6-6 माह की सजा,मजदूर की मौत के 8 साल बाद आया फैसला, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कोर्ट सख्त,पढ़े ये खबर

विक्रम सीमेंट प्लांट में लापरवाही पड़ी भारी, दो कर्मचारियों को 6-6 माह की सजा,मजदूर की मौत के 8 साल बाद आया फैसला, सुरक्षा मानकों

BIG NEWS : विक्रम सीमेंट प्लांट में लापरवाही पड़ी भारी, दो कर्मचारियों को 6-6 माह की सजा,मजदूर की मौत के 8 साल बाद आया फैसला, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर कोर्ट सख्त,पढ़े ये खबर

जावद (नीमच)।
ग्राम खोर स्थित विक्रम सीमेंट प्लांट में सुरक्षा लापरवाही के कारण हुई मजदूर की मौत के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, जावद श्रीमती शुभा रिछारिया दीक्षित ने फैक्ट्री के दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए 6-6 माह के सश्रम कारावास एवं 500-500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।

⚠️ जर्जर प्लेट पर कराया जा रहा था काम, नहीं दिए गए सुरक्षा उपकरण
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा के अनुसार घटना 27 फरवरी 2018 की है।
फैक्ट्री में कलर का कार्य कर रहे मजदूर हुकमसिंह को ऊपर साइट पर काम के दौरान जर्जर प्लेट पर भेजा गया।
काम करते समय प्लेट टूट गई और मजदूर नीचे गिर गया, जिससे गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि प्लेट पहले से ही खराब और खतरनाक स्थिति में थी, इसके बावजूद वहां वर्क परमिट जारी किया गया।

???? सुरक्षा में गंभीर लापरवाही, जिम्मेदार ठहराए गए कर्मचारी
जांच में यह भी पाया गया कि—मजदूर को कोई सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए खतरनाक स्थान पर काम रोकने का प्रयास नहीं किया गया जिम्मेदार अधिकारियों ने जोखिम को नजरअंदाज किया इन लापरवाहियों के चलते फैक्ट्री के:सिविल इंजीनियर शशिकांत तिवारी कर्मचारी मदनलाल सैनी को भारतीय दंड संहिता की धारा 304ए के तहत दोषी ठहराया गया।

⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी—“श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि”
विचारण के दौरान एडीपीओ सुखराम गरवाल ने मजबूत पैरवी करते हुए आरोप सिद्ध किए।
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि:औद्योगिक संस्थानों में श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है,लापरवाही सीधे मानव जीवन को प्रभावित करती है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अन्य आरोपी: एक फरार, एक की मृत्यु
मामले में कुल चार आरोपी थे—
एक आरोपी नित्यानंद फरार हो गया
एक आरोपी गोपीचंद खटीक की मृत्यु हो चुकी है
जिसके बाद शेष दो आरोपियों पर ही निर्णय सुनाया गया।

यह फैसला उद्योगों के लिए स्पष्ट संदेश है कि
सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब सीधे सजा तक पहुंच सकती है।