BIG NEWS: सुबह खुला तो हर कोई रह गया हैरान… आखिर क्यों बंद पड़ा था नीमच का पूरा मेडिकल बाजार?”, ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का फूटा गुस्सा, मची जिलेभर में सनसनी, पहुंची सरकार तक सीधी चेतावनी,पढ़े पवन राव शिंदे की ये खबर
नीमच। जिले में अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री और क्विक कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ बुधवार को बड़ा विरोध देखने को मिला। नीमच जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर जिलेभर की मेडिकल दुकानों को एक दिन के लिए बंद रखकर सांकेतिक हड़ताल की गई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम जिलाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठाई गई।

एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय किलेवाला, सचिव राकेश पटवा और कोषाध्यक्ष अजय तिवारी ने संयुक्त रूप से बताया कि इंटरनेट और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बिना वैध चिकित्सकीय परामर्श के दवाओं की बिक्री जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना डॉक्टर सलाह दवा वितरण और भारी छूट देकर नियमों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे छोटे केमिस्टों का व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।

ज्ञापन में कहा गया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 एवं नियम 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद वर्षों से ऑनलाइन कंपनियां धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री कर रही हैं। एसोसिएशन ने वर्ष 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) और कोविड काल में जारी GSR 220(E) का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग कर कई कंपनियां अनियंत्रित होम डिलीवरी चला रही हैं।

केमिस्ट संगठन ने केंद्र सरकार से मांग की कि अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए, बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन दवा वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, अत्यधिक छूट और प्रिडेटरी प्राइसिंग पर रोक लगे तथा संबंधित अधिसूचनाओं को वापस लिया जाए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि कोविड महामारी के दौरान देशभर के दवा विक्रेताओं ने कठिन परिस्थितियों में भी लोगों तक दवाएं पहुंचाकर स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था को मजबूती दी थी। ऐसे में छोटे लाइसेंसधारी केमिस्टों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

जिले में मेडिकल दुकानों के बंद रहने से आम लोगों को दिनभर दवाओं की खरीद में परेशानी का सामना भी करना पड़ा, हालांकि संगठन ने इसे जनहित और मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।