BIG NEWS : शासकीय महाविद्यालय जीरन में विवाद, तबादले के बाद भी उठे कई सवाल,सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपा कुमावत का प्रशासनिक आधार पर रामपुरा स्थानांतरण,पढ़े खबर 

BIG NEWS : शासकीय महाविद्यालय जीरन में विवाद, तबादले के बाद भी उठे कई सवाल,सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपा कुमावत का प्रशासनिक आधार पर रामपुरा स्थानांतरण,पढ़े खबर 

जीरन | कॉलेज में लंबे समय से चल रहा प्रशासनिक और सियासी विवाद फिलहाल एक नए मोड़ पर आ गया है। मध्य प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रभारी प्राचार्य डॉ. दीपा कुमावत का तबादला शासकीय महाविद्यालय रामपुरा कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद जहां एक पक्ष ने राहत की सांस ली है, वहीं कॉलेज के भविष्य को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

12वीं फेल छात्र के बीएससी तक पहुंचने का मामला

तबादले की खबरों के बीच कॉलेज से एक कथित अनियमितता का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि एक छात्र ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण किए बिना ही बीएससी में प्रवेश ले लिया और दो वर्षों की परीक्षाएं भी उत्तीर्ण कर लीं। यदि यह तथ्य सही हैं, तो प्रवेश प्रक्रिया और दस्तावेज़ सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

फर्जी नियुक्तियों पर बड़े सवाल 
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा उनके पूर्व कार्यकाल को लेकर मनमर्जी की भर्तियों और पक्षपात जैसे आरोपों की चर्चा की जा रही है। शिक्षा संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। यदि पूर्व में किसी प्रकार की अनियमितताओं की शिकायतें हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई ही संस्थान की विश्वसनीयता को बनाए रख सकती है। फिलहाल स्थिति स्पष्ट होने तक यह पूरा मामला अटकलों के दायरे में है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर जारी आदेशों के बाद ही सामने आएगा।


प्रभार को लेकर अटकलें
कॉलेज में नए प्रभारी प्राचार्य को लेकर भी चर्चाओं का दौर जारी है। प्राध्यापक दिव्या खरारे को पुनः प्रभार मिलने की संभावनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पूर्व कार्यकाल से जुड़े आरोपों और चर्चाओं को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और छात्रों के बीच यह मांग उठ रही है कि यदि प्रवेश या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके। फिलहाल सबकी निगाहें उच्च शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच और प्रशासनिक निर्णयों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विवाद की परतों के पीछे की सच्चाई क्या है।