BIG NEWS : नीमच में कृषि आदान व्यापारियों का अल्टीमेटम—मांगें नहीं मानी तो खरीफ से पहले अनिश्चितकालीन बंद,बीज, खाद और कीटनाशक नीतियों में बदलाव की मांग; ‘साथी’ पोर्टल से लेकर लाइसेंस नियमों तक राहत की अपील,पढ़े ये खबर
नीमच में कृषि आदान व्यापारियों का अल्टीमेटम—मांगें नहीं मानी तो खरीफ से पहले अनिश्चितकालीन बंद,बीज, खाद और कीटनाशक नीतियों
खबर:
कृषि आदान (बीज, खाद और कीटनाशक) से जुड़े व्यापारियों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार के सामने एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया है। व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी खरीफ सीजन से पहले वे अनिश्चितकालीन बंद पर जाने को मजबूर होंगे, जिसका सीधा असर देश के कृषि उत्पादन और किसानों पर पड़ेगा।

ज्ञापन में व्यापारियों ने ‘साथी’ (SATHI) पोर्टल को लेकर राहत की मांग करते हुए इसे ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए वैकल्पिक बनाने की बात कही है। उनका कहना है कि इसकी अनिवार्यता केवल निर्माता और थोक विक्रेताओं तक सीमित रखी जानी चाहिए। इसके साथ ही HTBT बीज नीति को लेकर भी स्पष्टता और अवैध बीजों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने या अधिकृत डीलरों को विनियमित बिक्री की अनुमति देने की मांग उठाई गई है।

व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि खाद, बीज और कीटनाशक के सीलबंद पैकिंग में यदि नमूना फेल होता है तो विक्रेता को दोषी न ठहराया जाए, बल्कि उसे केवल गवाह (साक्षी) का दर्जा दिया जाए। उनका तर्क है कि विक्रेता केवल लाइसेंस के आधार पर सीलबंद माल बेचता है, इसलिए गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी निर्माता कंपनी की होनी चाहिए।
इसके अलावा एक्सपायर्ड कीटनाशकों को लेकर कंपनियों पर यह जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है कि वे पुराने या समाप्त हो चुके स्टॉक को अनिवार्य रूप से वापस लें। नए बीज अधिनियम और प्रस्तावित कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को ‘प्रथम पक्ष’ बनाए जाने के प्रावधान को भी शिथिल करने की मांग रखी गई है।
ज्ञापन में व्यापारियों ने किसानों द्वारा झूठी शिकायतों के मामलों में जिला स्तर पर जांच कमेटी गठित करने की मांग की है, ताकि बिना जांच के कार्रवाई से बचा जा सके। साथ ही छोटी-छोटी बातों पर लाइसेंस निलंबन की स्थिति में 21 दिनों के भीतर स्वतः बहाली का प्रावधान लागू करने की भी अपील की गई है।

व्यापारियों ने हर साल कंपनी का प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त करने, दोहरी लाइसेंस व्यवस्था खत्म करने और निजी विक्रेताओं व सहकारी संस्थाओं पर समान रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि वर्तमान में निजी व्यापारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।
इसके साथ ही बागवानी और गर्मी की फसलों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन के अंत में व्यापारियों ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि एक माह के भीतर इन समस्याओं का समाधान किया जाए। अन्यथा वे खरीफ सीजन से पहले अनिश्चितकालीन बंद करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागों की होगी।